जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र के नियम बदलेंगे: 1 अक्टूबर 2026 से देरी पर बदलेगी प्रक्रिया, जानें नया नियम

जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र रोजमर्रा की जिंदगी में महत्वपूर्ण दस्तावेज हैं। जन्म प्रमाण पत्र का इस्तेमाल स्कूल-कॉलेज में दाखिले, सरकारी सेवाओं और विभिन्न दस्तावेजी प्रक्रियाओं में किया जाता है। वहीं मृत्यु प्रमाण पत्र बैंक, बीमा, पेंशन, संपत्ति और अन्य कानूनी एवं वित्तीय कार्यों में जरूरी होता है।

अब जन्म और मृत्यु के देरी से रजिस्ट्रेशन को लेकर नियमों में महत्वपूर्ण बदलाव होने जा रहा है। Registration of Births and Deaths (Amendment) Act, 2026 के प्रावधान 1 अक्टूबर 2026 से लागू होंगे। केंद्र सरकार के 16 सितंबर 2026 के नोटिफिकेशन में 1 अक्टूबर 2026 को कानून लागू होने की तारीख निर्धारित की गई है।

2026 में क्या बदला है?

Registration of Births and Deaths Act, 1969 की धारा 13 में संशोधन किया गया है। नए प्रावधानों में एक साल से अधिक देरी वाले मामलों को दो अलग-अलग श्रेणियों में बांटा गया है।

एक साल से अधिक लेकिन दो साल के भीतर जन्म या मृत्यु की जानकारी देने पर संबंधित रजिस्ट्रेशन के लिए जिला मजिस्ट्रेट (DM), सब-डिविजनल मजिस्ट्रेट (SDM) या जिला मजिस्ट्रेट द्वारा अधिकृत कार्यकारी मजिस्ट्रेट का आदेश आवश्यक होगा। संबंधित अधिकारी जन्म या मृत्यु की जानकारी की सत्यता का सत्यापन करने के बाद आदेश जारी कर सकते हैं। इसके साथ निर्धारित शुल्क भी लागू होगा।

दो साल से ज्यादा देरी पर क्या होगा?

यदि जन्म या मृत्यु के दो साल से अधिक समय बाद रजिस्ट्रेशन के लिए आवेदन किया जाता है, तो प्रक्रिया अलग होगी। ऐसे मामले में Judicial Magistrate First Class (JMFC) के आदेश की आवश्यकता होगी।

JMFC संबंधित जन्म या मृत्यु की जानकारी की सत्यता का सत्यापन करने के बाद आदेश जारी कर सकते हैं। इसके अलावा निर्धारित शुल्क का भुगतान भी करना होगा।

30 दिन और एक साल के बीच देरी पर क्या नियम है?

2026 का संशोधन मुख्य रूप से एक साल से अधिक देरी वाले मामलों की व्यवस्था को दो स्तरों में बांटता है। मौजूदा कानूनी व्यवस्था के अनुसार सामान्य समयसीमा के बाद देरी से रजिस्ट्रेशन के लिए अलग प्रावधान हैं। केंद्र के Civil Registration System के अनुसार जन्म, मृत्यु और मृत-जन्म (still birth) की सामान्य रिपोर्टिंग अवधि 21 दिन है। 21 दिन के भीतर रिपोर्ट करने पर सामान्यतः कोई शुल्क नहीं लिया जाता।

2023 के संशोधन के बाद एक साल से अधिक देरी के लिए मजिस्ट्रेट के आदेश की व्यवस्था थी। 2026 का संशोधन इसी व्यवस्था को बदलकर एक साल से अधिक लेकिन दो साल तक DM/SDM/अधिकृत Executive Magistrate और दो साल से अधिक JMFC की अलग व्यवस्था करता है।

आम लोगों के लिए इसका क्या मतलब है?

मान लीजिए किसी बच्चे का जन्म हुआ और परिवार ने निर्धारित समय में उसका रजिस्ट्रेशन नहीं कराया। यदि बाद में जन्म प्रमाण पत्र की आवश्यकता पड़ती है, तो देरी की अवधि के आधार पर संबंधित अधिकारी से आदेश लेना पड़ सकता है।

इसी तरह किसी व्यक्ति की मृत्यु के बाद मृत्यु का रजिस्ट्रेशन समय पर नहीं कराया गया और दो साल से अधिक समय बीत गया, तो नए नियम के अनुसार Judicial Magistrate First Class के आदेश की प्रक्रिया लागू होगी।

इसलिए परिवारों के लिए यह जरूरी है कि जन्म और मृत्यु की जानकारी निर्धारित समय में रजिस्ट्रार के पास दर्ज कराई जाए, ताकि बाद में अतिरिक्त कागजी प्रक्रिया और अधिकारी की मंजूरी की आवश्यकता न पड़े।

जन्म प्रमाण पत्र क्यों जरूरी है?

जन्म प्रमाण पत्र व्यक्ति के जन्म की आधिकारिक जानकारी का महत्वपूर्ण रिकॉर्ड है। इसका इस्तेमाल शिक्षा से संबंधित कार्यों, सरकारी सेवाओं और विभिन्न दस्तावेजी प्रक्रियाओं में किया जाता है। भारत के Civil Registration System के अनुसार जन्म और मृत्यु का पंजीकरण अनिवार्य है और स्थानीय स्तर पर नियुक्त रजिस्ट्रार इसके पंजीकरण की प्रक्रिया संभालते हैं।

मृत्यु प्रमाण पत्र क्यों जरूरी है?

मृत्यु प्रमाण पत्र किसी व्यक्ति की मृत्यु का आधिकारिक रिकॉर्ड होता है। परिवार को बैंक खाते, बीमा, पेंशन, संपत्ति के हस्तांतरण और अन्य कानूनी एवं वित्तीय मामलों में इसकी जरूरत पड़ सकती है। इसलिए मृत्यु के बाद भी रजिस्ट्रेशन को अनावश्यक रूप से लंबित नहीं रखना चाहिए।

1 अक्टूबर 2026 से लागू होगा नया कानून

Registration of Births and Deaths (Amendment) Act, 2026 को 6 अगस्त 2026 को अधिनियम के रूप में प्रकाशित किया गया था। इसके बाद गृह मंत्रालय के Registrar General of India कार्यालय ने 16 सितंबर 2026 को अधिसूचना जारी कर 1 अक्टूबर 2026 को इसके प्रावधान लागू करने की तारीख निर्धारित की।

एक नजर में नए नियम

देरी आवश्यक प्रक्रिया
सामान्य अवधि के भीतर सामान्य रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया
1 साल से अधिक और 2 साल तक DM/SDM/अधिकृत Executive Magistrate का आदेश
2 साल से अधिक Judicial Magistrate First Class (JMFC) का आदेश

महत्वपूर्ण: देरी से रजिस्ट्रेशन के मामलों में संबंधित अधिकारी द्वारा जानकारी की सत्यता का सत्यापन और निर्धारित शुल्क की आवश्यकता कानून में रखी गई है।

निष्कर्ष: जन्म या मृत्यु की घटना का रजिस्ट्रेशन समय पर कराना सबसे सरल तरीका है। 1 अक्टूबर 2026 से लागू होने वाले संशोधित प्रावधानों के बाद लंबे समय से लंबित मामलों में संबंधित मजिस्ट्रेट के आदेश की जरूरत पड़ सकती है। इसलिए जिन लोगों का जन्म या मृत्यु रजिस्ट्रेशन अभी लंबित है, उन्हें अपने स्थानीय रजिस्ट्रार/संबंधित प्राधिकरण से प्रक्रिया की जानकारी लेकर समय पर आवेदन करना चाहिए।