सीईओ सोनवानी के नेतृत्व में PM आवास योजना में फिसड्डी पड़ा पोड़ी उपरोड़ा: सम्पदा ऐप रिपोर्ट ने खोली पोल, सीईओ पर भ्रष्टाचार के आरोप, तबादले के 15 दिन बाद भी नहीं हुए कार्यमुक्त

पोड़ी उपरोड़ा ( कोरबा अपडेट)। ग्रामीण गरीबों को पक्का आवास उपलब्ध कराने के उद्देश्य से केंद्र सरकार द्वारा संचालित प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) का क्रियान्वयन कोरबा जिले के पोड़ी उपरोड़ा विकासखंड में गंभीर सवालों के घेरे में है। शासकीय सम्पदा ऐप रिपोर्ट के अनुसार विकासखंड जिले के अन्य ब्लॉकों की तुलना में बेहद खराब प्रदर्शन कर रहा है। इसी बीच वर्तमान जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) भूपेंद्र सोनवानी पर जनप्रतिनिधियों ने विकास कार्यों में लापरवाही और भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए हैं। आरोपों के बीच उनका स्थानांतरण आदेश जारी होने के बावजूद 15 दिन बाद भी कार्यमुक्त नहीं किए जाने से प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठने लगे हैं।

सम्पदा ऐप रिपोर्ट में सामने आया कमजोर प्रदर्शन

शासकीय आंकड़ों के अनुसार पोड़ी उपरोड़ा विकासखंड में प्रधानमंत्री आवास योजना की प्रगति अपेक्षा से काफी कम है। रिपोर्ट के मुताबिक विकासखंड में कुल 8,400 आवासों का लक्ष्य निर्धारित किया गया था, लेकिन अब तक कुल प्रगति 50.76 प्रतिशत ही दर्ज की गई है। जिले के अन्य विकासखंडों की तुलना में यह प्रदर्शन काफी पीछे माना जा रहा है। रिपोर्ट में करतला (60.37%), कटघोरा (61.76%) और पाली (68.10%) जैसे विकासखंडों का प्रदर्शन पोड़ी उपरोड़ा से बेहतर बताया गया है।

केवल आवास निर्माण ही नहीं, बल्कि प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC), महतारी सदन तथा शवदाह गृह/कब्रिस्तान जैसे बुनियादी निर्माण कार्यों में भी विकासखंड का प्रदर्शन संतोषजनक नहीं बताया जा रहा है।

जनप्रतिनिधियों के आरोप

क्षेत्र के कई जनप्रतिनिधियों का आरोप है कि वर्तमान सीईओ के कार्यकाल में विकास कार्यों की गति धीमी पड़ गई है। उनका कहना है कि प्रधानमंत्री आवास योजना सहित कई योजनाओं का समय पर क्रियान्वयन नहीं हो पा रहा है, जिससे हितग्राहियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

कुछ जनप्रतिनिधियों ने यह भी आरोप लगाया है कि विकास कार्यों के बजाय कार्यालय में अनियमितताओं और कथित भ्रष्टाचार की शिकायतें लगातार बढ़ी हैं। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है और संबंधित अधिकारी की ओर से इस संबंध में सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

पहले भी बदले गए थे सीईओ

स्थानीय स्तर पर चर्चा है कि इससे पहले भी विकासखंड में खराब कार्यप्रणाली के कारण सीईओ का परिवर्तन किया गया था। नई नियुक्ति से विकास कार्यों में सुधार की उम्मीद थी, लेकिन जनप्रतिनिधियों का दावा है कि अपेक्षित परिणाम नहीं मिले और कई योजनाओं की प्रगति प्रभावित रही।

तबादले के बाद भी नहीं हुई रिलीफ

मामले का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि वर्तमान सीईओ का स्थानांतरण आदेश जारी होने के लगभग 15 दिन बाद भी उन्हें कार्यमुक्त नहीं किया गया है। इसको लेकर जनपद सदस्यों और सरपंचों में नाराजगी देखी जा रही है। उनका कहना है कि यदि स्थानांतरण आदेश जारी हो चुका है तो प्रशासन को शीघ्र कार्यमुक्त करने की प्रक्रिया पूरी करनी चाहिए।

जनप्रतिनिधियों का आरोप है कि कार्यमुक्ति में देरी से प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं। हालांकि जिला प्रशासन की ओर से देरी के कारणों पर आधिकारिक जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई है।

आंदोलन की चेतावनी

सरपंच संघ और जनपद सदस्यों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं की गई तो वे आंदोलन का रास्ता अपनाएंगे। उनके अनुसार जनपद कार्यालय की तालाबंदी, धरना-प्रदर्शन और चक्का जाम जैसे कार्यक्रमों की रणनीति तैयार की जा रही है। उनका कहना है कि यदि प्रशासन ने शीघ्र निर्णय नहीं लिया तो आंदोलन को व्यापक रूप दिया जाएगा।

प्रशासन की प्रतिक्रिया का इंतजार

इस पूरे मामले में जिला प्रशासन तथा संबंधित अधिकारी की आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आना अभी बाकी है। यदि प्रशासन की ओर से कोई स्पष्टीकरण या पक्ष सामने आता है तो उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।

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