कोरबा। छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में चर्चित सचिव पत्नी हत्या मामले में जिला न्यायालय ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए आरोपी सचिव पति को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। तृतीय अपर सत्र न्यायाधीश सुनील कुमार नन्दे की अदालत ने मामले की सुनवाई पूरी होने के बाद आरोपी अभिनेक कुमार लदेर को पत्नी सुषमा खुसरो की हत्या का दोषी करार देते हुए भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 103(1) के तहत आजीवन कारावास और अर्थदंड से दंडित किया है। वहीं साक्ष्य छिपाने के अपराध में भी अलग से तीन वर्ष के कारावास की सजा सुनाई गई है। दोनों सजाएं साथ-साथ चलेंगी।
फिल्म देखने की बात पर शुरू हुआ विवाद
अदालत में प्रस्तुत साक्ष्यों के अनुसार, आरोपी अभिनेक कुमार लदेर और सुषमा खुसरो की मुलाकात वर्ष 2023 में हुई थी। दोनों के बीच प्रेम संबंध विकसित हुआ और 5 मई 2024 को बिलासपुर स्थित आर्य समाज मंदिर में विवाह कर लिया। विवाह के बाद दोनों कोरबा के हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी, गोकुल नगर में किराए के मकान में पति-पत्नी के रूप में रह रहे थे।
22 जुलाई 2025 की सुबह सुषमा ने अपने पति से निहारिका टॉकीज में फिल्म देखने चलने की बात कही। इसी बात को लेकर दोनों के बीच विवाद हो गया। अभियोजन के अनुसार विवाद इतना बढ़ गया कि आरोपी ने पत्नी की हत्या करने का फैसला कर लिया।
तकिए से दबाकर की हत्या
जांच के दौरान सामने आया कि आरोपी ने दोपहर के समय पत्नी के मुंह और नाक को तकिए से दबाकर उसकी हत्या कर दी। हत्या के बाद उसने घटना को आत्महत्या या दुर्घटना का रूप देने की कोशिश की।
साक्ष्य मिटाने के उद्देश्य से आरोपी ने कमरे में कागज और कपड़े इकट्ठा कर शव में आग लगा दी, ताकि मामला आग से हुई मौत जैसा प्रतीत हो। इसके बाद उसने पुलिस को भ्रामक जानकारी देकर खुद को निर्दोष साबित करने का प्रयास किया।
पुलिस को बयान बदलने पर हुआ शक
घटना की सूचना मिलने पर थाना सिविल लाइन रामपुर पुलिस ने मर्ग कायम कर जांच शुरू की। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने बताया कि वह बैंक के काम से बाहर गया था और लौटने पर घर के अंदर धुआं देखा। उसने दावा किया कि दरवाजा अंदर से बंद था और बालकनी के रास्ते घर में पहुंचने पर पत्नी का जला हुआ शव मिला।
हालांकि जांच के दौरान पुलिस को आरोपी के बयान में कई विरोधाभास मिले। पूछताछ के दौरान वह बार-बार अपने बयान बदलता रहा, जिससे पुलिस का संदेह गहरा गया।
तकनीकी जांच से खुला राज
पुलिस ने वैज्ञानिक एवं तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर मामले की जांच आगे बढ़ाई। घटनास्थल से मिले सबूतों, परिस्थितिजन्य साक्ष्यों और तकनीकी विश्लेषण के आधार पर आरोपी की भूमिका संदिग्ध पाई गई।
हिरासत में लेकर कड़ी पूछताछ करने पर आखिरकार आरोपी टूट गया और उसने पत्नी की हत्या करना स्वीकार कर लिया। इसके बाद 24 जुलाई 2025 को एफआईआर दर्ज की गई और 26 जुलाई को आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।
अदालत में मजबूत पैरवी
मामले की विवेचना पूरी होने के बाद पुलिस ने आरोप पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से अतिरिक्त शासकीय अभिभाषक एवं लोक अभियोजक कृष्ण कुमार द्विवेदी ने मजबूत पैरवी की। अभियोजन ने अदालत के समक्ष परिस्थितिजन्य साक्ष्य, तकनीकी रिपोर्ट और अन्य प्रमाण प्रस्तुत किए, जिनके आधार पर न्यायालय ने आरोपी को दोषी माना।
न्यायालय ने सुनाई आजीवन कारावास की सजा
तृतीय अपर सत्र न्यायाधीश सुनील कुमार नन्दे ने आरोपी अभिनेक कुमार लदेर को भारतीय न्याय संहिता की धारा 103(1) के तहत हत्या का दोषी मानते हुए आजीवन कारावास और 100 रुपये अर्थदंड से दंडित किया। अर्थदंड जमा नहीं करने की स्थिति में एक माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
इसके अतिरिक्त भारतीय न्याय संहिता की धारा 238 के तहत साक्ष्य नष्ट करने के अपराध में तीन वर्ष के कारावास और 100 रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई गई। अर्थदंड जमा नहीं करने पर एक माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि दोनों सजाएं साथ-साथ चलेंगी।
समाज के लिए महत्वपूर्ण संदेश
यह फैसला उन मामलों में महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जहां आरोपी अपराध छिपाने के लिए घटनास्थल से साक्ष्य मिटाने का प्रयास करते हैं। अदालत ने स्पष्ट किया कि वैज्ञानिक जांच, परिस्थितिजन्य साक्ष्य और निष्पक्ष विवेचना के आधार पर अपराधी कानून से बच नहीं सकता।
निष्कर्ष
कोरबा के इस चर्चित हत्याकांड में न्यायालय के फैसले ने यह संदेश दिया है कि घरेलू विवाद के नाम पर की गई जघन्य हत्या और साक्ष्य मिटाने की कोशिश को कानून गंभीर अपराध मानता है। पुलिस की तकनीकी जांच, मजबूत विवेचना और अभियोजन की प्रभावी पैरवी के चलते आरोपी को आजीवन कारावास की सजा मिली। यह फैसला न्याय व्यवस्था में विश्वास को और मजबूत करने वाला माना जा रहा है।
