कोरबा/पोड़ी उपरोड़ा। जनपद पंचायत पोड़ी उपरोड़ा क्षेत्र में विकास कार्यों की आईडी (कार्य आईडी) जारी नहीं होने को लेकर पिछले कई दिनों से चल रहा विवाद आखिरकार मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) के तबादले के साथ शांत होता नजर आ रहा है। जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों के बीच लगातार बढ़ते टकराव, आंदोलन की चेतावनी और जनाक्रोश के बाद राज्य सरकार ने मुख्य कार्यपालन अधिकारी भूपेंद्र कुमार सोनवानी का तबादला कर दिया है। शासन द्वारा जारी आदेश के अनुसार उन्हें प्रशासनिक दृष्टिकोण से जनपद पंचायत सूरजपुर में पदस्थ किया गया है।
यह मामला पिछले कुछ समय से पोड़ी उपरोड़ा क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ था। स्थानीय जनपद सदस्य, सरपंच और अन्य जनप्रतिनिधि लगातार आरोप लगा रहे थे कि क्षेत्र में स्वीकृत विकास कार्यों की कार्य आईडी समय पर जारी नहीं की जा रही है। आईडी जारी नहीं होने के कारण अनेक निर्माण एवं विकास कार्य शुरू नहीं हो पा रहे थे, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में विकास की गति प्रभावित हो रही थी। जनप्रतिनिधियों का कहना था कि जनता द्वारा चुने जाने के बावजूद वे अपने क्षेत्र में विकास कार्य शुरू नहीं करा पा रहे हैं, जिससे लोगों में भी नाराजगी बढ़ रही थी।
स्थिति उस समय और अधिक गंभीर हो गई जब जनपद सदस्यों एवं सरपंचों ने अपनी मांगों को लेकर जनपद पंचायत कार्यालय में तालाबंदी कर दी। उन्होंने आरोप लगाया कि कई बार लिखित एवं मौखिक रूप से प्रशासन के समक्ष मांग रखने के बावजूद उनकी समस्याओं का समाधान नहीं किया गया। आंदोलन के दौरान जनप्रतिनिधियों ने स्पष्ट कहा था कि यदि विकास कार्यों की आईडी शीघ्र जारी नहीं की गई तो वे उग्र आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे।
इसके बाद सरपंच संघ और जनपद सदस्यों ने प्रशासन को चेतावनी देते हुए दोबारा तालाबंदी और चक्काजाम करने का अल्टीमेटम भी दिया। आंदोलन की इस घोषणा के बाद प्रशासनिक हलकों में हलचल तेज हो गई। क्षेत्र में बढ़ते जनाक्रोश और संभावित कानून-व्यवस्था की स्थिति को देखते हुए शासन स्तर पर पूरे मामले की जानकारी ली गई।
इसी बीच छत्तीसगढ़ शासन के आदिम जाति विकास विभाग द्वारा एक आधिकारिक आदेश जारी किया गया। आदेश में मुख्य कार्यपालन अधिकारी भूपेंद्र कुमार सोनवानी का प्रशासनिक आधार पर तबादला करते हुए उन्हें मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जनपद पंचायत सूरजपुर के पद पर पदस्थ करने की जानकारी दी गई। शासन ने आदेश को तत्काल प्रभाव से लागू करने के निर्देश भी दिए हैं। तबादले के बाद अब पोड़ी उपरोड़ा जनपद पंचायत में नए मुख्य कार्यपालन अधिकारी की नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू होने की संभावना है।
तबादले की खबर सामने आते ही जनपद सदस्यों और सरपंच संघ के बीच खुशी का माहौल देखा गया। कई जनप्रतिनिधियों ने इसे उनके लंबे संघर्ष और लोकतांत्रिक आंदोलन की सफलता बताया। उनका कहना है कि उनका उद्देश्य किसी व्यक्ति विशेष का विरोध करना नहीं था, बल्कि क्षेत्र के विकास कार्यों को गति देना था। उन्होंने उम्मीद जताई कि नए अधिकारी के आने के बाद रुकी हुई कार्य आईडी जल्द जारी होंगी और विकास कार्य समय पर शुरू हो सकेंगे।
जनप्रतिनिधियों ने जिला प्रशासन से यह भी मांग की है कि जिन विकास कार्यों की प्रशासनिक स्वीकृति पहले ही मिल चुकी है, उनकी कार्य आईडी तत्काल जारी की जाए ताकि निर्माण कार्यों में और अधिक देरी न हो। उनका कहना है कि सड़क, भवन, पेयजल, नाली, सामुदायिक भवन और अन्य मूलभूत सुविधाओं से जुड़े कई कार्य लंबे समय से लंबित हैं, जिससे ग्रामीणों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
राजनीतिक और प्रशासनिक जानकारों का मानना है कि यह पूरा घटनाक्रम इस बात का संकेत है कि स्थानीय स्तर पर विकास कार्यों में समन्वय बनाए रखना कितना आवश्यक है। यदि जनप्रतिनिधियों और प्रशासन के बीच संवाद की कमी हो जाए तो विकास कार्य प्रभावित होते हैं और इसका सीधा असर आम जनता पर पड़ता है। ऐसे मामलों में समय रहते समाधान निकालना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी होती है।
फिलहाल क्षेत्र के लोगों की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि नए अधिकारी की नियुक्ति कब होती है और रुके हुए विकास कार्यों की कार्य आईडी कब तक जारी की जाती है। यदि प्रशासन शीघ्र निर्णय लेकर लंबित प्रक्रियाओं को पूरा करता है तो पोड़ी उपरोड़ा क्षेत्र में विकास कार्यों को नई गति मिल सकती है। वहीं जनप्रतिनिधियों ने भी संकेत दिए हैं कि यदि उनकी प्रमुख मांगें पूरी होती हैं तो वे प्रस्तावित आंदोलन को समाप्त कर क्षेत्र के विकास में प्रशासन का सहयोग करेंगे।
अब देखना होगा कि शासन के इस फैसले के बाद पोड़ी उपरोड़ा जनपद पंचायत में प्रशासनिक व्यवस्था कितनी तेजी से सामान्य होती है और लंबे समय से रुके विकास कार्य कब धरातल पर दिखाई देते हैं। जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों को उम्मीद है कि आने वाले दिनों में कार्य आईडी जारी होने के साथ विकास योजनाओं का लाभ सीधे जनता तक पहुंचेगा।
