पोंड़ी उपरोड़ा। कोरबा जिले के पोड़ी उपरोड़ा स्थित 100 बिस्तर वाले कन्या छात्रावास में गुरुवार को उस समय माहौल तनावपूर्ण हो गया, जब छात्राओं ने छात्रावास की अधीक्षिका के खिलाफ खुलकर विरोध प्रदर्शन किया। छात्राओं ने अधीक्षिका पर दुर्व्यवहार, मानसिक प्रताड़ना, धमकी देने और छात्रावास परिसर में बाहरी पुरुष के प्रवेश की अनुमति देने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। छात्राओं का कहना है कि यदि गुरुवार शाम तक प्रशासन उनकी शिकायतों पर कार्रवाई नहीं करता है, तो वे शुक्रवार से छात्रावास के मुख्य द्वार पर अनिश्चितकालीन महाधरना शुरू करेंगी।
छात्राओं के अनुसार वे शिक्षा प्राप्त करने के उद्देश्य से अपने घरों से दूर रहकर छात्रावास में निवास कर रही हैं, लेकिन यहां उन्हें सुरक्षित वातावरण मिलने के बजाय मानसिक तनाव और भय का सामना करना पड़ रहा है। उनका आरोप है कि अधीक्षिका छोटी-छोटी बातों पर अपमानजनक व्यवहार करती हैं तथा छात्रावास से निकाल देने की धमकी देकर डराने का प्रयास करती हैं। इससे छात्राओं का मनोबल प्रभावित हो रहा है और पढ़ाई पर भी प्रतिकूल असर पड़ रहा है।
सबसे गंभीर आरोप छात्रावास की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर लगाया गया है। छात्राओं का कहना है कि छात्रावास में बाहरी पुरुष का नियमित आना-जाना होता है, जबकि कन्या छात्रावास के नियमों के अनुसार बिना अनुमति किसी पुरुष का प्रवेश प्रतिबंधित होता है। छात्राओं का कहना है कि इस स्थिति के कारण वे स्वयं को असुरक्षित महसूस करती हैं। उनका यह भी आरोप है कि इस संबंध में शिकायत करने पर उनकी बात सुनने के बजाय उन्हें ही चुप रहने और परिणाम भुगतने की चेतावनी दी जाती है।
छात्राओं ने बताया कि यह पहली बार नहीं है जब उन्होंने अपनी समस्याओं को प्रशासन के सामने रखा हो। उनके अनुसार कुछ महीने पहले भी जिला कलेक्टर को लिखित शिकायत देकर अधीक्षिका को हटाने तथा मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की गई थी। हालांकि उस समय कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। छात्राओं का आरोप है कि शिकायत के बाद मामला ठंडे बस्ते में चला गया, जिसके कारण उन्हें दोबारा विरोध का रास्ता अपनाना पड़ा।
गुरुवार को विरोध के दौरान छात्राओं ने स्पष्ट कहा कि यदि प्रशासन शाम तक जांच के आदेश जारी कर अधीक्षिका के विरुद्ध आवश्यक कार्रवाई नहीं करता है, तो वे अगले दिन से छात्रावास परिसर के बाहर शांतिपूर्ण एवं अनिश्चितकालीन धरना प्रारंभ करेंगी। छात्राओं ने मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए तथा यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो जिम्मेदार व्यक्तियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाए।
यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब सरकार बालिका शिक्षा और सुरक्षा को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न योजनाओं का संचालन कर रही है। ऐसे में यदि किसी कन्या छात्रावास की छात्राएं स्वयं को असुरक्षित महसूस कर रही हैं, तो यह व्यवस्था और निगरानी प्रणाली पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है। छात्राओं का कहना है कि उन्हें केवल सुरक्षित वातावरण और सम्मानजनक व्यवहार चाहिए, ताकि वे बिना किसी भय के अपनी पढ़ाई जारी रख सकें।
स्थानीय स्तर पर यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है। अभिभावकों और स्थानीय लोगों का भी मानना है कि यदि छात्राओं द्वारा लगाए गए आरोप सही हैं, तो प्रशासन को तत्काल जांच कर उचित कार्रवाई करनी चाहिए। वहीं दूसरी ओर, किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले आरोपों की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच आवश्यक है, ताकि तथ्य स्पष्ट हो सकें।
खबर लिखे जाने तक जिला प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया था। साथ ही, अधीक्षिका का पक्ष भी सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आया है। ऐसे में आरोपों की पुष्टि प्रशासनिक जांच के बाद ही हो सकेगी।
अब सभी की नजर जिला प्रशासन की आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई है। यदि प्रशासन समय रहते छात्राओं की शिकायतों पर संज्ञान लेकर निष्पक्ष जांच कराता है, तो स्थिति सामान्य हो सकती है। वहीं यदि छात्राओं की मांगों पर त्वरित निर्णय नहीं लिया जाता है, तो प्रस्तावित महाधरना इस मामले को और व्यापक बना सकता है।
