कलेक्टर की सख्त कार्रवाई: रिश्वत मांगने के आरोप में तहसील कार्यालय कटघोरा की सहायक ग्रेड-02 मंजू कृष्णा धिरही निलंबित

कटघोरा, 22 जून। जिले में शासकीय कार्यों में पारदर्शिता, जवाबदेही और भ्रष्टाचार मुक्त प्रशासन सुनिश्चित करने के उद्देश्य से जिला प्रशासन लगातार सख्त कदम उठा रहा है। इसी कड़ी में कलेक्टर की सख्त कार्रवाई देखने को मिली है, जहां तहसील कार्यालय कटघोरा में पदस्थ सहायक ग्रेड-02 श्रीमती मंजू कृष्णा धिरही को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। यह कार्रवाई नकल जारी करने के एवज में आवेदक से कथित रूप से अवैध राशि मांगने की शिकायत की जांच के बाद की गई है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार तहसील कार्यालय कटघोरा से संबंधित एक शिकायत अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) एवं दण्डाधिकारी कटघोरा के समक्ष प्रस्तुत की गई थी। शिकायतकर्ता किशन कुमार ने आरोप लगाया था कि कार्यालय में नकल जारी करने के लिए उससे अवैध राशि की मांग की गई। शिकायत के समर्थन में एक वीडियो रिकॉर्डिंग भी प्रस्तुत की गई थी, जिसमें कथित रूप से संबंधित कर्मचारी की भूमिका सामने आई थी।

मामले को गंभीरता से लेते हुए अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) कटघोरा द्वारा शिकायत की विस्तृत जांच कराई गई। जांच के दौरान उपलब्ध साक्ष्यों और वीडियो रिकॉर्डिंग का परीक्षण किया गया। प्रारंभिक जांच में शिकायत प्रथम दृष्टया सही पाए जाने के बाद संबंधित कर्मचारी के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई की अनुशंसा करते हुए विस्तृत प्रतिवेदन जिला प्रशासन को भेजा गया।

जिला प्रशासन द्वारा प्रतिवेदन का परीक्षण किए जाने के बाद यह पाया गया कि संबंधित कर्मचारी का आचरण शासकीय सेवक के लिए निर्धारित नियमों के अनुरूप नहीं है। कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी कुणाल दुदावत ने मामले को गंभीर मानते हुए छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1965 के नियम-3 के उल्लंघन का संज्ञान लिया। इसके आधार पर छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील) नियम, 1966 के नियम-9 के अंतर्गत कार्रवाई करते हुए सहायक ग्रेड-02 श्रीमती मंजू कृष्णा धिरही को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया।

निलंबन आदेश के अनुसार जांच पूरी होने तक उनका मुख्यालय तहसील कार्यालय पोंड़ीउपरोड़ा निर्धारित किया गया है। निलंबन अवधि के दौरान उन्हें नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता प्रदान किया जाएगा। प्रशासनिक नियमों के तहत निलंबन की अवधि में कर्मचारी को निर्धारित मुख्यालय में उपस्थित रहना होगा तथा सक्षम अधिकारी की अनुमति के बिना मुख्यालय नहीं छोड़ सकेगा।

कलेक्टर की सख्त कार्रवाई को जिले में भ्रष्टाचार के विरुद्ध प्रशासन के स्पष्ट संदेश के रूप में देखा जा रहा है। जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि आम नागरिकों को मिलने वाली शासकीय सेवाओं में किसी भी प्रकार की अनियमितता या अवैध वसूली को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। नागरिकों की शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई करते हुए दोषियों के विरुद्ध कठोर कदम उठाए जाएंगे।

जिले में पिछले कुछ समय से प्रशासन द्वारा विभिन्न विभागों में कार्यप्रणाली की निगरानी बढ़ाई गई है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि जनता को बिना किसी परेशानी के समय पर सेवाएं प्राप्त हों तथा शासकीय कार्यालयों में पारदर्शिता बनी रहे। प्रशासन ने आम नागरिकों से भी अपील की है कि यदि किसी कार्यालय में उनसे किसी प्रकार की अवैध राशि की मांग की जाती है या किसी कर्मचारी द्वारा नियमों के विरुद्ध कार्य किया जाता है, तो इसकी जानकारी तत्काल संबंधित अधिकारियों को दें।

कलेक्टर कुणाल दुदावत के नेतृत्व में जिला प्रशासन भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के मामलों में ‘शून्य सहिष्णुता’ की नीति पर कार्य कर रहा है। हालिया कार्रवाई इसी नीति का हिस्सा मानी जा रही है। प्रशासन का मानना है कि शासकीय सेवाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही स्थापित करने के लिए ऐसे मामलों में त्वरित एवं कठोर कार्रवाई आवश्यक है।

इस कार्रवाई से जिले के अन्य शासकीय कर्मचारियों को भी स्पष्ट संदेश गया है कि यदि कोई कर्मचारी अपने पद का दुरुपयोग करता है या आम नागरिकों से अनुचित लाभ लेने का प्रयास करता है, तो उसके विरुद्ध नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी। जिला प्रशासन ने दोहराया है कि जनहित सर्वोपरि है और शासन की योजनाओं एवं सेवाओं का लाभ नागरिकों तक बिना किसी बाधा और भ्रष्टाचार के पहुंचाना प्रशासन की प्राथमिकता है।

इस प्रकार कलेक्टर की सख्त कार्रवाई ने एक बार फिर यह साबित किया है कि कोरबा जिला प्रशासन पारदर्शी, जवाबदेह और जनहितैषी शासन व्यवस्था के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है तथा भ्रष्टाचार के मामलों में किसी भी प्रकार की ढिलाई नहीं बरती जाएगी।

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