पोड़ी उपरोड़ा (कोरबा)। कोरबा जिले के अंतर्गत आने वाली जनपद पंचायत पोड़ी उपरोड़ा में सोमवार को उस समय राजनीतिक और प्रशासनिक हलचल तेज हो गई, जब सामान्य सभा की बैठक में शामिल होने पहुंचे जनपद सदस्यों ने सामूहिक रूप से बैठक का बहिष्कार कर दिया। बैठक से बाहर निकलने के बाद सभी सदस्य जनपद पंचायत कार्यालय के मुख्य द्वार के सामने धरने पर बैठ गए और कार्यालय में तालाबंदी की चेतावनी देते हुए प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
धरने पर बैठे जनपद सदस्यों ने जनपद पंचायत प्रशासन, विशेष रूप से मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि कार्यालय में भ्रष्टाचार और कमीशनखोरी चरम पर पहुंच चुकी है। सदस्यों का आरोप है कि विकास कार्यों से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारियां और निर्माण कार्यों की आईडी (ID) जानबूझकर जनप्रतिनिधियों से छिपाई जा रही हैं, जिससे पारदर्शिता प्रभावित हो रही है और विकास कार्यों की निगरानी करना मुश्किल हो रहा है।
जनप्रतिनिधियों ने लगाए गंभीर आरोप
धरने के दौरान जनपद सदस्यों ने लाउडस्पीकर के माध्यम से अपनी बात रखते हुए कहा कि प्रदेश में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में सरकार पारदर्शी और जवाबदेह प्रशासन देने का प्रयास कर रही है, लेकिन स्थानीय स्तर पर कुछ अधिकारी सरकार की मंशा को कमजोर करने का कार्य कर रहे हैं।
सदस्यों का कहना है कि जनपद क्षेत्र में संचालित विभिन्न निर्माण एवं विकास कार्यों की जानकारी प्राप्त करना उनका संवैधानिक और प्रशासनिक अधिकार है। इसके बावजूद संबंधित अधिकारियों द्वारा उन्हें आवश्यक दस्तावेज, कार्यों की स्वीकृति, तकनीकी जानकारी और आईडी उपलब्ध नहीं कराई जा रही है। इससे जनप्रतिनिधियों में भारी नाराजगी है।
“जब जनप्रतिनिधि सुरक्षित नहीं, तो जनता का क्या होगा”
विरोध प्रदर्शन कर रहे सदस्यों ने कहा कि यदि चुने हुए जनप्रतिनिधियों को ही उनके अधिकारों से वंचित किया जा रहा है, तो आम जनता की समस्याओं का समाधान कैसे होगा। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासनिक स्तर पर मनमानी और तानाशाही रवैया अपनाया जा रहा है।
धरना स्थल पर मौजूद सदस्यों ने कहा कि जनपद क्षेत्र के विकास कार्यों की निगरानी और जनहित के मुद्दों को उठाना उनकी जिम्मेदारी है, लेकिन अधिकारियों द्वारा जानकारी छिपाकर उन्हें अपने कर्तव्यों के निर्वहन से रोका जा रहा है। सदस्यों ने इसे लोकतांत्रिक व्यवस्था और जनप्रतिनिधियों के अधिकारों पर सीधा हमला बताया।
पारदर्शिता की मांग को लेकर एकजुट हुए सदस्य
जनपद सदस्यों ने मांग की कि जनपद क्षेत्र में संचालित सभी निर्माण एवं विकास कार्यों की विस्तृत जानकारी सार्वजनिक की जाए। साथ ही प्रत्येक कार्य की स्वीकृति, लागत, एजेंसी और कार्य आईडी की जानकारी जनप्रतिनिधियों को उपलब्ध कराई जाए ताकि कार्यों की निगरानी और गुणवत्ता सुनिश्चित की जा सके।
सदस्यों ने यह भी कहा कि यदि प्रशासन पारदर्शिता के साथ कार्य कर रहा है तो जानकारी साझा करने में किसी प्रकार की आपत्ति नहीं होनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि जानकारी छिपाए जाने से भ्रष्टाचार की आशंका और अधिक मजबूत होती है।
कार्यालय में तालाबंदी की चेतावनी

धरने के दौरान जनपद सदस्यों ने स्पष्ट रूप से चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र कार्रवाई नहीं की गई और कथित भ्रष्टाचार की निष्पक्ष जांच नहीं कराई गई, तो आंदोलन को और उग्र किया जाएगा। सदस्यों ने कहा कि आवश्यकता पड़ने पर जनपद पंचायत कार्यालय में तालाबंदी भी की जाएगी।
विरोध प्रदर्शन के कारण जनपद पंचायत कार्यालय परिसर में दिनभर तनावपूर्ण माहौल बना रहा। क्षेत्र के नागरिकों और जनप्रतिनिधियों की नजरें अब प्रशासनिक अधिकारियों की आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।
प्रशासन के जवाब का इंतजार
समाचार लिखे जाने तक जनपद पंचायत प्रशासन की ओर से इस मामले में कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया था। वहीं धरने पर बैठे सदस्य अपनी मांगों को लेकर अड़े हुए थे और भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच तथा विकास कार्यों की जानकारी सार्वजनिक करने की मांग दोहरा रहे थे।
अब देखना यह होगा कि प्रशासन जनपद सदस्यों की मांगों पर क्या रुख अपनाता है और विवाद का समाधान किस प्रकार निकलता है। फिलहाल पोड़ी उपरोड़ा जनपद पंचायत का यह मामला क्षेत्र में चर्चा का प्रमुख विषय बना हुआ है।
