छत्तीसगढ़ में अब बिना VLTD नहीं चलेंगी यात्री बसें, 15 दिन की अंतिम मोहलत; नियम तोड़ने पर होगी सख्त कार्रवाई

रायपुर, 26 जून 2026। छत्तीसगढ़ सरकार ने सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और तकनीक आधारित बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। परिवहन विभाग ने राज्य की सभी यात्री बसों में वाहन लोकेशन ट्रैकिंग डिवाइस (VLTD) लगाना और उसे हर समय सक्रिय रखना अनिवार्य कर दिया है। विभाग ने बस संचालकों को नियमों का पालन करने के लिए 15 दिन की अंतिम मोहलत दी है। स्पष्ट किया गया है कि निर्धारित समय सीमा समाप्त होने के बाद जिन बसों में ट्रैकिंग डिवाइस नहीं मिलेगी या डिवाइस निष्क्रिय होगी, उनके संचालकों के खिलाफ मोटरयान अधिनियम, 1988 के प्रावधानों के तहत कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

इस संबंध में गुरुवार को नवा रायपुर स्थित इंद्रावती भवन में परिवहन सचिव एवं परिवहन आयुक्त एस. प्रकाश की अध्यक्षता में महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में राज्यभर के बस संचालकों तथा VLTD लगाने के लिए अधिकृत वेंडरों ने भाग लिया। बैठक का मुख्य उद्देश्य बसों में ट्रैकिंग डिवाइस लगाने की वर्तमान स्थिति की समीक्षा करना और सभी वाहनों में समयबद्ध तरीके से इसकी स्थापना सुनिश्चित करना था।

परिवहन सचिव एस. प्रकाश ने स्पष्ट निर्देश दिए कि जिन बसों में अभी तक VLTD स्थापित नहीं किया गया है, उनमें आगामी 15 दिनों के भीतर अनिवार्य रूप से डिवाइस लगाई जाए। वहीं जिन बसों में पहले से डिवाइस लगी हुई है लेकिन तकनीकी कारणों से सक्रिय नहीं है, उसे तत्काल चालू कराया जाए। उन्होंने कहा कि यात्री सुरक्षा से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा और समय सीमा समाप्त होने के बाद नियमों का उल्लंघन करने वालों पर सख्त कार्रवाई होगी।

परिवहन विभाग के अनुसार यह निर्णय सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों और भारत सरकार द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के अनुरूप लिया गया है। वर्ष 2025 में राजस्थान के फलोदी तथा तेलंगाना के रंगारेड्डी में हुए भीषण सड़क हादसों के बाद सार्वजनिक परिवहन में आधुनिक सुरक्षा तकनीकों को लागू करने पर विशेष जोर दिया गया है। इन्हीं निर्देशों के तहत अब छत्तीसगढ़ में भी सभी यात्री बसों के लिए VLTD अनिवार्य किया गया है।

नई व्यवस्था लागू होने के बाद राज्य मुख्यालय में स्थापित कमांड एंड कंट्रोल सेंटर से सभी यात्री बसों की निगरानी की जाएगी। उपग्रह आधारित इस प्रणाली के माध्यम से किसी भी बस की वास्तविक समय (रियल टाइम) लोकेशन, उसकी गति, निर्धारित मार्ग पर संचालन तथा समय के अनुसार चलने की जानकारी प्राप्त की जा सकेगी। यदि कोई बस निर्धारित मार्ग से भटकती है या किसी प्रकार की अनियमितता होती है, तो संबंधित अधिकारियों को तत्काल सूचना मिल जाएगी।

इस व्यवस्था का सबसे बड़ा लाभ यात्रियों को भी मिलेगा। परिवहन विभाग द्वारा विकसित ‘संगवारी’ मोबाइल ऐप के माध्यम से यात्री अपनी बस की लाइव लोकेशन देख सकेंगे। इससे बसों के आने-जाने की सही जानकारी मिलेगी, अनावश्यक प्रतीक्षा कम होगी और यात्रा अधिक सुरक्षित तथा सुविधाजनक बनेगी। विशेष रूप से महिलाओं, बच्चों, वरिष्ठ नागरिकों और दूरदराज क्षेत्रों में यात्रा करने वाले लोगों की सुरक्षा को इससे मजबूती मिलेगी।

बैठक में अतिरिक्त परिवहन आयुक्त डी. रविशंकर ने बताया कि राज्य के सभी जिलों में ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकॉग्निशन (ANPR) कैमरे तथा इंटेलिजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (ITMS) भी स्थापित किए जा रहे हैं। इन आधुनिक तकनीकों की मदद से यातायात नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहनों की तत्काल पहचान की जा सकेगी और उनके विरुद्ध प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित होगी। इससे सड़क सुरक्षा को बढ़ावा मिलेगा और यातायात व्यवस्था पहले से अधिक मजबूत होगी।

परिवहन विभाग ने बताया कि वाहन लोकेशन ट्रैकिंग डिवाइस (VLTD) एक उपग्रह आधारित अत्याधुनिक प्रणाली है, जो वाहन की हर पल की स्थिति और लोकेशन की जानकारी नियंत्रण केंद्र तक पहुंचाती है। दुर्घटना, आपातकाल अथवा किसी अन्य संकट की स्थिति में राहत एवं बचाव कार्य तेजी से शुरू करने में यह तकनीक बेहद उपयोगी साबित होती है। साथ ही बसों के संचालन की निगरानी होने से नियमों का पालन सुनिश्चित होगा और परिवहन व्यवस्था में पारदर्शिता भी आएगी।

विभाग ने बस संचालकों से अपील की है कि वे निर्धारित 15 दिनों की समय सीमा के भीतर सभी आवश्यक औपचारिकताएं पूरी कर लें और अपनी बसों में ट्रैकिंग डिवाइस स्थापित कर उसे सक्रिय रखें। सरकार का कहना है कि यह निर्णय किसी प्रकार की औपचारिकता नहीं, बल्कि लाखों यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से लिया गया है।

कुल मिलाकर, छत्तीसगढ़ सरकार का यह कदम सार्वजनिक परिवहन को आधुनिक, सुरक्षित और तकनीक आधारित बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। आने वाले दिनों में VLTD, कमांड एंड कंट्रोल सेंटर, ANPR कैमरे और संगवारी ऐप जैसी व्यवस्थाओं के माध्यम से राज्य की परिवहन प्रणाली अधिक जवाबदेह, सुरक्षित और प्रभावी बनने की उम्मीद है।

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