पचरा पंचायत सचिव पर भ्रष्टाचार और वित्तीय अनियमितताओं के आरोप, ग्रामीणों ने कलेक्टर से की निष्पक्ष जांच व स्थानांतरण की मांग

कोरबा जिले के पोड़ी उपरोड़ा विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत पचरा में पदस्थ पंचायत सचिव पर भ्रष्टाचार एवं वित्तीय अनियमितताओं के गंभीर आरोप लगाए गए हैं। ग्रामीणों, पंच एवं उपसरपंच ने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर सचिव के खिलाफ निष्पक्ष जांच कराने तथा तत्काल स्थानांतरण की मांग की है। मामले की गंभीरता को देखते हुए करारोपण अधिकारी सीबी सिंह एवं उप अभियंता दीपक साहू को जांच अधिकारी नियुक्त किया गया है। हालांकि ग्रामीणों का आरोप है कि इससे पहले भी क्षेत्र की कई पंचायतों में अनियमितताओं की जांच हुई, लेकिन कार्रवाई नहीं होने से लोगों का प्रशासन पर भरोसा कमजोर हुआ है।

ग्रामीणों द्वारा सौंपे गए ज्ञापन के अनुसार पंचायत सचिव लगभग 15 वर्षों से एक ही ग्राम पंचायत में पदस्थ हैं। इस दौरान विभिन्न विकास कार्यों में वित्तीय गड़बड़ी किए जाने के आरोप लगाए गए हैं। ज्ञापन में कहा गया है कि फर्जी बिलों के माध्यम से शासकीय राशि का दुरुपयोग किया गया तथा पाइपलाइन विस्तार, पंचायत भवन निर्माण, पुलिया निर्माण, सड़क मरम्मत सहित कई विकास कार्यों में अनियमितताएं हुई हैं।

ग्रामीणों का यह भी आरोप है कि पंचायत की आय-व्यय संबंधी जानकारी ग्राम सभा में पारदर्शी ढंग से प्रस्तुत नहीं की जाती। कई ऐसे विकास कार्य अभिलेखों में पूर्ण दर्शाए गए हैं, जिनका वास्तविक स्वरूप जमीन पर दिखाई नहीं देता। ग्रामीणों ने पूरे मामले की उच्चस्तरीय निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई करने और पंचायत सचिव का तत्काल स्थानांतरण करने की मांग की है।

मामले की जांच के लिए करारोपण अधिकारी सीबी सिंह एवं उप अभियंता दीपक साहू को जांच अधिकारी नियुक्त किया गया है। इसके बावजूद ग्रामीणों में इस जांच को लेकर संदेह बना हुआ है। उनका कहना है कि पोड़ी उपरोड़ा विकासखंड की अन्य पंचायतों में भी पहले कई मामलों की जांच हुई थी, जिनमें अनियमितताएं सामने आने की चर्चा रही, लेकिन संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। इसी कारण ग्रामीणों को आशंका है कि कहीं यह मामला भी केवल जांच तक सीमित न रह जाए।

विभागीय सूत्रों के अनुसार किसी भी पंचायत सचिव को लंबे समय तक एक ही ग्राम पंचायत में पदस्थ रखना प्रशासनिक दृष्टि से उचित नहीं माना जाता। सामान्यतः तीन वर्ष या उससे अधिक समय तक एक ही पंचायत में कार्यरत सचिव का स्थानांतरण प्राथमिकता के आधार पर किया जाना चाहिए, ताकि प्रशासनिक पारदर्शिता बनी रहे और स्थानीय प्रभाव से बचा जा सके।

सूत्रों के अनुसार पंचायत सचिव को अपने गृह ग्राम अथवा ससुराल की ग्राम पंचायत में पदस्थ नहीं किया जा सकता। इसके अतिरिक्त यदि सचिव का कोई निकट संबंधी उसी पंचायत में सरपंच या उपसरपंच निर्वाचित हो जाता है, तो हितों के टकराव की स्थिति से बचने के लिए सचिव का स्थानांतरण किया जाना चाहिए।

ग्रामीणों का दावा है कि पंचायत में कई ऐसे विकास कार्य रिकॉर्ड में दर्ज हैं, जिनका वास्तविक अस्तित्व स्थल पर नहीं है। साथ ही क्षेत्र में यह भी चर्चा है कि कुछ अधिकारी मामले की जांच को लेकर संकोच कर रहे हैं। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। ऐसे में जांच रिपोर्ट आने के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

इस पूरे मामले में जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) ने निष्पक्ष जांच कराने का आश्वासन दिया है। अब सभी की निगाहें जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं। यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित अधिकारियों एवं कर्मचारियों पर विभागीय कार्रवाई की जा सकती है। वहीं यदि आरोप निराधार साबित होते हैं तो जांच रिपोर्ट से स्थिति स्पष्ट हो जाएगी।

फिलहाल ग्राम पंचायत पचरा में लगाए गए आरोपों ने पंचायत प्रशासन की कार्यप्रणाली और विकास कार्यों की पारदर्शिता को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना होगा कि जांच कितनी निष्पक्ष और प्रभावी होती है तथा प्रशासन ग्रामीणों की शिकायतों पर क्या कार्रवाई करता है।

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