कोरबा: 37.26 लाख रुपये के कथित गबन में ग्राम पंचायत गुरसिया की सरपंच हेमलता बघेल निलंबित, SDM की बड़ी कार्रवाई

कोरबा, 10 जुलाई 2026। कोरबा जिले के पोड़ी उपरोड़ा जनपद पंचायत अंतर्गत ग्राम पंचायत गुरसिया में कथित वित्तीय अनियमितता और सरकारी राशि के गबन का बड़ा मामला सामने आया है। इस मामले में ग्राम पंचायत की सरपंच हेमलता बघेल को 37 लाख 26 हजार रुपये की सरकारी राशि के कथित गबन के आरोप में एसडीएम न्यायालय द्वारा तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। इस कार्रवाई के बाद पंचायत क्षेत्र सहित पूरे जिले में हड़कंप मच गया है। मामला सामने आने के बाद पंचायतों में वित्तीय पारदर्शिता, सरकारी धन के उपयोग और जवाबदेही को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल उठने लगे हैं।

 

प्राप्त जानकारी के अनुसार, ग्राम पंचायत गुरसिया के ग्रामीणों ने सरपंच हेमलता बघेल के खिलाफ सरकारी धन के दुरुपयोग और वित्तीय अनियमितता की शिकायत प्रशासन से की थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि पंचायत के विकास कार्यों के लिए स्वीकृत राशि का नियमों के अनुरूप उपयोग नहीं किया गया तथा सरकारी धन को निजी खाते में स्थानांतरित कर लिया गया। शिकायत को गंभीरता से लेते हुए प्रशासन ने पूरे मामले की जांच शुरू कराई।

 

जांच के दौरान सामने आया कि सरपंच हेमलता बघेल ने तत्कालीन पंचायत सचिव रविद्र कुमार सिंह के साथ संयुक्त हस्ताक्षर के माध्यम से ग्राम पंचायत के सरकारी बैंक खाते से 37 लाख 26 हजार रुपये अपने निजी बचत खाते में स्थानांतरित कर लिए। जांच अधिकारियों ने इसे वित्तीय नियमों का गंभीर उल्लंघन और प्रथम दृष्टया सरकारी राशि के गबन का मामला माना है।

 

जांच प्रतिवेदन में यह भी उल्लेख किया गया कि संबंधित राशि पंचायत के विभिन्न स्वीकृत निर्माण एवं विकास कार्यों के लिए निर्धारित थी। ऐसे में सरकारी धन का निजी खाते में स्थानांतरण न केवल वित्तीय नियमों के विपरीत है, बल्कि पंचायत राज व्यवस्था की पारदर्शिता और जवाबदेही पर भी गंभीर प्रश्न खड़े करता है। प्रशासन ने मामले को गंभीर वित्तीय अनियमितता की श्रेणी में रखते हुए आगे की वैधानिक कार्रवाई प्रारंभ कर दी है।

 

एसडीएम न्यायालय द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि उपलब्ध दस्तावेजों और प्रारंभिक जांच के आधार पर प्रथम दृष्टया वित्तीय अनियमितता तथा सरकारी धन के दुरुपयोग के पर्याप्त आधार पाए गए हैं। इसी के मद्देनज़र छत्तीसगढ़ पंचायत राज अधिनियम के प्रावधानों के तहत सरपंच हेमलता बघेल को तत्काल प्रभाव से उनके पद से निलंबित किया जाता है। निलंबन अवधि के दौरान पंचायत के प्रशासनिक कार्य नियमानुसार संचालित किए जाएंगे।

 

इस कार्रवाई के बाद पंचायत प्रतिनिधियों और स्थानीय लोगों के बीच मामले की व्यापक चर्चा शुरू हो गई है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि जांच में लगाए गए आरोप पूरी तरह सही पाए जाते हैं तो दोषियों के विरुद्ध न केवल विभागीय बल्कि आपराधिक कार्रवाई भी की जानी चाहिए, ताकि भविष्य में कोई भी जनप्रतिनिधि सरकारी धन के दुरुपयोग का साहस न कर सके।

 

विशेषज्ञों का मानना है कि पंचायतों को ग्रामीण विकास की सबसे महत्वपूर्ण इकाई माना जाता है। केंद्र और राज्य सरकार द्वारा हर वर्ष करोड़ों रुपये विभिन्न विकास योजनाओं के लिए पंचायतों को उपलब्ध कराए जाते हैं। ऐसे में यदि इन निधियों के उपयोग में पारदर्शिता नहीं होगी तो विकास कार्य प्रभावित होंगे और आम जनता का विश्वास भी कमजोर होगा।

 

सूत्रों के अनुसार प्रशासन अब इस पूरे मामले में वित्तीय लेन-देन, बैंक खातों तथा संबंधित दस्तावेजों की विस्तृत जांच कर रहा है। यदि जांच में अन्य लोगों की भूमिका भी सामने आती है तो उनके विरुद्ध भी नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है। फिलहाल संबंधित अधिकारियों द्वारा दस्तावेजों का परीक्षण जारी है।

 

इस घटना ने एक बार फिर पंचायत स्तर पर वित्तीय निगरानी व्यवस्था को मजबूत करने की आवश्यकता को रेखांकित किया है। सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि पंचायतों के बैंक खातों, विकास कार्यों और भुगतान प्रक्रिया का नियमित ऑडिट किया जाना चाहिए, ताकि सरकारी धन का सही उपयोग सुनिश्चित हो सके। साथ ही डिजिटल निगरानी और समय-समय पर सामाजिक अंकेक्षण (सोशल ऑडिट) को भी प्रभावी बनाया जाना चाहिए।

 

गौरतलब है कि पिछले कुछ समय से प्रदेश के विभिन्न जिलों में पंचायतों में वित्तीय अनियमितताओं से जुड़े कई मामले सामने आए हैं। ऐसे मामलों में प्रशासन द्वारा की जा रही कार्रवाई यह संदेश देती है कि सरकारी धन के दुरुपयोग के मामलों में किसी भी स्तर पर लापरवाही या अनियमितता को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अब सभी की निगाहें इस मामले की विस्तृत जांच और आगे होने वाली कानूनी कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।