प्रदेश में सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए बड़ी खबर सामने आई है। General Administration Department (जीएडी) ने राज्य के विभिन्न विभागों में भर्ती प्रक्रिया और शैक्षणिक योग्यता नियमों में बड़ा बदलाव करते हुए 38 सरकारी पदों के लिए नई योग्यता निर्धारित कर दी है। नई व्यवस्था को तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है।
सबसे बड़ा बदलाव चतुर्थ श्रेणी पदों में किया गया है। अब भृत्य, चौकीदार, स्वीपर, माली और प्रोग्रेसर जैसे पदों के लिए न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता 12वीं पास तय कर दी गई है। पहले इन पदों के लिए 5वीं, 8वीं या 10वीं पास योग्यता मान्य थी।
क्लर्क और कंप्यूटर पदों के लिए कड़े नियम
जीएडी द्वारा जारी नए नियमों के अनुसार डाटा एंट्री ऑपरेटर और कंप्यूटर ऑपरेटर पद के लिए अब किसी भी विषय में स्नातक डिग्री के साथ एक वर्षीय कंप्यूटर डिप्लोमा और 8,000 की-डिप्रेशन प्रति घंटा की टाइपिंग गति अनिवार्य होगी।
वहीं सहायक ग्रेड-3 और स्टेनो टाइपिस्ट पदों के लिए स्नातक डिग्री, कंप्यूटर डिप्लोमा तथा 5,000 की-डिप्रेशन प्रति घंटा की टाइपिंग स्पीड जरूरी होगी। शीघ्रलेखक पद के लिए स्नातक के साथ शीघ्रलेखन प्रमाण पत्र और कंप्यूटर डिप्लोमा अनिवार्य किया गया है।
ड्राइवर और निरीक्षक पदों के लिए भी नई योग्यता
वाहन चालक पद के लिए अब 12वीं पास के साथ स्थायी ड्राइविंग लाइसेंस आवश्यक होगा। वहीं श्रम निरीक्षक, उप निरीक्षक, मंडी निरीक्षक और पर्यवेक्षक जैसे पदों के लिए किसी भी विषय में स्नातक डिग्री को आधारभूत योग्यता बनाया गया है।
पुराने सभी नियम निरस्त
जीएडी ने आदेश जारी करते हुए वर्ष 2008, 2013, 2022 और दिसंबर 2025 में जारी पुराने शैक्षणिक योग्यता संबंधी सभी नियमों को समाप्त कर दिया है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि जिन विभागों ने अभी तक अपने भर्ती नियमों में संशोधन नहीं किया है, वहां भी नई योग्यता स्वतः लागू मानी जाएगी।
विभागों पर जताई नाराजगी
जीएडी ने सभी अपर मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव और सचिवों को पत्र लिखकर नाराजगी भी जाहिर की है। विभाग का कहना है कि 25 मई तक जानकारी भेजने की अंतिम तिथि के बावजूद कई विभागों ने शैक्षणिक योग्यता संबंधी जानकारी उपलब्ध नहीं कराई। इसके बाद 24 मार्च को जारी पत्र के आधार पर समान पदों के लिए समान योग्यता लागू करने का निर्णय लिया गया है।नई भर्ती व्यवस्था लागू होने के बाद अब सरकारी नौकरियों की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों को उच्च शैक्षणिक योग्यता और कंप्यूटर दक्षता पर अधिक ध्यान देना होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटलाइजेशन को बढ़ावा देने और प्रशासनिक कार्यों को आधुनिक बनाने के उद्देश्य से यह बदलाव किया गया है।
