कोरबा अपडेट न्यूज। कटघोरा-अंबिकापुर राष्ट्रीय राजमार्ग को फोरलेन सड़क के रूप में विकसित करने की महत्वाकांक्षी परियोजना अब धरातल पर उतरती नजर आ रही है। सड़क विस्तार और पुनर्संरेखन से प्रभावित क्षेत्रों में भूमि संबंधी अनियमितताओं पर रोक लगाने के लिए जिला प्रशासन ने बड़ा कदम उठाया है। परियोजना से प्रभावित 18 गांवों में जमीन की खरीद-बिक्री, हस्तांतरण, बंटवारा तथा खाता विभाजन पर अस्थायी रोक लगाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। प्रशासन का यह निर्णय भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया को पारदर्शी और विवादमुक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
जानकारी के अनुसार भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) द्वारा कटघोरा-शिवनगर-अंबिकापुर मार्ग के उन्नयन एवं चौड़ीकरण का कार्य प्रस्तावित किया गया है। इस परियोजना के तहत मौजूदा राष्ट्रीय राजमार्ग को फोरलेन में विकसित किया जाएगा, वहीं कुछ क्षेत्रों में नए मार्ग का निर्माण भी किया जाना है। परियोजना के लिए बड़ी मात्रा में निजी और शासकीय भूमि का अधिग्रहण आवश्यक होगा।
प्रशासन को आशंका है कि फोरलेन परियोजना की जानकारी सार्वजनिक होने के बाद प्रभावित क्षेत्रों में जमीन की खरीद-बिक्री और नामांतरण के मामलों में तेजी आ सकती है। कई बार ऐसी परिस्थितियों में मुआवजा प्राप्त करने के उद्देश्य से भूमि के कृत्रिम बंटवारे, फर्जी हस्तांतरण और स्वामित्व संबंधी विवाद सामने आते हैं। इससे न केवल भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया प्रभावित होती है बल्कि मुआवजा वितरण में भी जटिलताएं उत्पन्न होती हैं।
इन्हीं संभावित समस्याओं को देखते हुए जिला प्रशासन ने राजस्व एवं पंजीयन विभाग को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए हैं। अधिकारियों को प्रभावित क्षेत्रों में भूमि के लेन-देन पर विशेष निगरानी रखने और किसी भी प्रकार की संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तत्काल उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं। प्रशासन का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया निष्पक्ष, पारदर्शी और विवादरहित तरीके से पूरी हो सके।
बताया जा रहा है कि वर्तमान राष्ट्रीय राजमार्ग की मध्य रेखा से दोनों ओर 50-50 मीटर की सीमा में आने वाली भूमि को विशेष रूप से चिन्हित किया गया है। इसके अतिरिक्त पोड़ी उपरोड़ा और कोनकोना क्षेत्र में प्रस्तावित नए मार्ग से प्रभावित होने वाली जमीनों पर भी प्रशासन की नजर रहेगी। इन क्षेत्रों में किसी भी प्रकार के भूमि हस्तांतरण या खाता विभाजन के मामलों की गहन जांच की जाएगी।
फोरलेन परियोजना से प्रभावित गांवों में अमाखोखरा, रामपुर, तानाखार, बरपाली, पोड़ी उपरोड़ा, कोनकोना, गुरसिया, बंजारी, मड़ई, लमना, चोटिया, परला, कपानवापारा, केंदई, केतमा, मोरगा, मदनपुर और पुटा शामिल हैं। इन गांवों के किसानों और भूमि स्वामियों के बीच परियोजना को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। कई ग्रामीणों का मानना है कि सड़क निर्माण से क्षेत्र में विकास और रोजगार के अवसर बढ़ेंगे, वहीं कुछ लोग अपनी जमीन के अधिग्रहण और उचित मुआवजे को लेकर चिंतित भी हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार कटघोरा-अंबिकापुर फोरलेन सड़क उत्तर छत्तीसगढ़ और कोरबा क्षेत्र की यातायात व्यवस्था को नई दिशा दे सकती है। वर्तमान में इस मार्ग पर भारी वाहनों और यात्री वाहनों का दबाव लगातार बढ़ रहा है, जिससे दुर्घटनाओं और जाम की समस्या बनी रहती है। फोरलेन सड़क बनने के बाद आवागमन अधिक सुरक्षित और सुगम होने की उम्मीद है।
इसके साथ ही यह परियोजना औद्योगिक, व्यापारिक और पर्यटन गतिविधियों को भी गति प्रदान करेगी। कोरबा जैसे औद्योगिक क्षेत्र को उत्तर छत्तीसगढ़ से बेहतर सड़क संपर्क मिलने से परिवहन लागत में कमी आएगी और आर्थिक गतिविधियों को नया विस्तार मिलेगा।
प्रशासन का मानना है कि भूमि संबंधी लेन-देन पर प्रारंभिक स्तर पर नियंत्रण स्थापित कर भविष्य में उत्पन्न होने वाले विवादों को रोका जा सकता है। यही कारण है कि प्रभावित गांवों में अस्थायी प्रतिबंध लगाने की प्रक्रिया को प्राथमिकता दी जा रही है। कुल मिलाकर कटघोरा-अंबिकापुर फोरलेन परियोजना क्षेत्र के विकास की दृष्टि से एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है और प्रशासन इसे सफलतापूर्वक क्रियान्वित करने के लिए आवश्यक तैयारियों में जुट गया है।
